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Our Success Stories

अर्चित जैन उद्दंड व ज़िद्दी बालक था I उसके अभिभावकों को उस पर नियंत्रण पाना प्रायः असाध्य सा प्रतीत होता था I अध्ययन केंद्र में आने के पश्चात् उसके भीतर एक बड़ा परिवर्तन आया I उसके अभिभावकों को लगता है कि वह बहुत संस्कारित हो गया है I रोजाना प्रातः अपने माता-पिता के पैर छूता है I पहले वो खाना खाने में बहुत परेशान करता था अब वह शांति से बैठ कर खाना खाता है I उसकी माँ बहुत प्रसन्न है I
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अर्चित जैन – भगवां

अर्चिता जैन ( कक्षा 5) की समस्या समय का प्रबंधन ठीक से ना हो पाना थी I उसको ऐसा भी लगता था कि कुछ कठिन विषयों में वह प्रायः असहाय है I केंद्र में बताई गई विधि के अनुसार उसने अपनी एक समय सारिणी बनाई, उस समय सारिणी का अनुपालन करपाने के लिए वांछित इच्छा शक्ति अणुव्रत की पद्धति के पालन से प्राप्त की I अब वह अपने सभी कार्य समय से कर लेती है I उसका होमवर्क पूरा हो जाता है I यही नहीं, उसके पास डांस सीखने का वक्त भी निकल पाता है I अब उसे रोचक कहानियां पढ़ने का समय भी मिल जाता है I उसके स्कूल में अच्छे अंक आते हैं I अध्ययन केंद्र में बताई विधि के अनुसार पढ़ने से अब उसको पहले कठिन लगने वाले विषय भी समझ में आने लगे हैं I उसके भीतर आत्म-विश्वास बढ़ा है I अब वह एक अच्छी वक्ता भी है I उसकी माँ खुश है क्यूंकि वह गृह कार्य में भी हाथ बटाने लगी है I
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अर्चिता जैन – बड़ागांव

देवांशी जैन (कक्षा 2) को सुबह बिस्तर में से खींच कर उठाना पड़ता था I तब वह सुबह 8 बजे तक उठती थी I उसकी दिनचर्या प्रायः अनियमित सी रहती थी I अब वह सुबह स्वयं ही 5 बजे उठ जाती है I सबसे पहले वह दादा दादी और फिर माता पिता का अभिवादन करती है I उसके पश्चात् निवृत हो कुछ समय घर के बाहर टहलती है, फिर अपने आप नहा कर आसन पर पढ़ने बैठ जाती है I उसको पाठ आसानी से समझ में आ जाते हैं तथा होमवर्क पूरा कर लेती है I अब उसके बात करने के ढंग से आत्म नियंत्रण स्पष्ट दिखलायी पड़ता है I सहपाठी उससे परामर्श लेते हैं I इस बार उसके 94% अंक आये हैं I
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देवांशी जैन – बक्सवाह

मुस्कान जैन (कक्षा 3) के अंग्रेजी व गणित में शून्य अंक आये I अन्य विषयों में भी स्तिथि लगभग आस-पास ही थी I उसने अध्ययन केंद्र से एक निश्चित समय पर एक निश्चित स्थान पर बैठ कर पढ़ने की पद्धति जानी I उसने इसका उपयोग किया और मात्र एक माह के भीतर अंग्रेजी में 60% और गणित में 98% अंक प्राप्त किये I ऐसा नहीं कि बालिका कुशाग्र नहीं थी, पर पहले उसने कभी नियमित रूप से पढ़ने पर ध्यान ही नहीं दिया था I
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मुस्कान जैन – शाहगढ़, पंचायतीमंदिर

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